महेंद्र देवता: तेरा महेंद्र हूँ माँ

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महेंद्र देवता को पूजा जाता है। खास तौर पर टिहरी क्षेत्र में पूजे जाने वाले महेंद्र देवता की कहानी बड़ी अनोखी है। आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे की कैसे एक सामान्य सा मनुष्य देवता रूप लेकर प्रकट हुआ।

यह कहानी है एक मां के अपने प्यारे से बेटे से बिछड़ जाने की। यह एक दर्दभरी कहानी है ऐसे शख्स की जिसकों उसके करीबी दोस्तों ने ही मौत के घाट उतार दिया।

बहुत समय पहले की बात है, उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में स्थित पट्टी नेलचमी के मलयकोट गांव में महेंद्र नाम का लड़का रहता था। एक दिन वह सुबह- सुबह अपने कुछ साथियों के साथ बंदूक लेकर जंगल की और घूमने व शिकार पर जाता है। बंदूक को कंधे में रखकर खुशी- खुशी वह अपने दोस्तों के साथ घने जंगल की तरफ़ जाता है। परन्तु उसे इस बात का बिल्कुल भी ज्ञात नहीं था की आज उसके साथ क्या अनहोनी घटने वाली है।

दरअसल, जब वह सभी गांव से बहुत दूर जंगल में पहुंच जाते है तों वहां से छुपकर अपने शिकार की तलाश करते है। सभी दोस्तों में, महेंद्र सबसे आगे चल रहा होता है। वह सोचता है की उसके पीछे- पीछे उसका साथ देने के लिए उसके दोस्त मौजूद है। परन्तु उस बेचारे को क्या पता था की उसके दुश्मन रूपी दोस्त, उसके लिए घात लगाए बैठे है।

कुछ देर बाद महेंद्र के साथी पीछे से अचानक उस पर गोली चला देते है। गोली लगने से महेंद्र घायल होकर नीचे ज़मीन पर घिर जाता है। जिसके बाद वह सब मिलकर उसपे बड़े- बड़े पत्थरों से वार करते है।

अपने ही दोस्तों द्वारा महेंद्र उस घने जंगल में बेमौत मारा जाता है। वह घायल पड़ा हुआ जंगल में यहां- वहां भटकता है। परन्तु वहां कोई भी उसकी मदद करने वाला मौजूद नहीं रहता। उसका प्राण बहुत अधिक घबराने लगता है। जिसके चलते उसे आछरीयां भी घेर लेती है।

वह अपने सभी कुल देवी- देवताओं को पुकारता है परन्तु उसे कोई सहारा ना मिलने पर वह दम तोड़ देता है और उसकी मृत्यु हो जाती है।

कुछ समय बाद अचानक वह अपने घर पर किसी मनुष्य पर प्रकट तथा अवतरण होता है और अपनी मां को वह सब कुछ बताता है की उस पर कैसी विपदा आई व कैसे अपने ही दोस्तों द्वारा वह मारा गया।

यह भी पढ़े- जीतू बगड्वाल: उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कथा

इसके साथ ही वह अपनी मां से कहता है की- “ हे मां अब मैं सदा इस गांव में रहकर लोगों की मुसीबत में मदद करूँगा, मैंने अब देवता रूप धारण कर लिया है।”

जिसके बाद वह कहता है की हर साल मुझे बाजों व ढोल के साथ नचाना। तब से लेकर आज तक महेंद्र देवता को कुल देवता के रूप में पूजा जाता है। इसके साथ ही जो भी भक्त सच्चे मन से महेंद्र देवता का स्मरण करता है, उसके सारे कष्ट व दुख दूर हो जाते है।

Leave a comment